महाशिवरात्रिः शिव जी 64 शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए,12 शिवलिंग ही ढूंढ पाए

महाशिवरात्रिः शिव जी 64 शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए,12 शिवलिंग ही ढूंढ पाए

  • डॉ. शशि भूषण श्रीवास्तव
    महाशिवरात्रि का दिन बेहद ही खास होता है। इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा अर्चना की जाती है। वैसे तो हर महीने शिवरात्रि आती है लेकिन फाल्गुन मास की चतुर्दशी को आने वाली महाशिवरात्रि का विशेष महत्व माना जाता है। महाशिवरात्रि शिव और शक्ति के मिलन की रात का पर्व है। धार्मिक मान्यताओं अनुसार इस दिन व्रत पूजन करने से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।इस दिन भगवान शिव की पूजा विशेष सामग्रियों के साथ की जाती है। पूजा जैसे पुष्प, बिल्वपत्र, भाँग, धतूरा, बेर, जौ की बालें, आम्र मंजरी, मंदार पुष्प, गाय का कच्चा दूध, गन्ने का रस, दही, देशी घी, शहद, गंगा जल, साफ जल, कपूर, धूप, दीपक, रूई, चंदन, पंच फल, पंच मेवा, पंच रस, गंध रोली, इत्र, मौली जनेऊ, शिव और माँ पार्वती की श्रृंगार की सामग्री, वस्त्राभूषण, रत्न, पंच मिष्ठान्न, दक्षिणा, पूजा के बर्तन, कुशासन आदि।महाशिवरात्रि पर्व मनाने को लेकर कई कथाएं प्रचलित हैं। जिसमें सबसे प्रसिद्ध कथा के अनुसार ये पर्व शिव और माता पार्वती के मिलन की रात के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन पार्वती जी का विवाह भगवान शिव से हुआ था। एक मान्यता ये भी है कि इसी दिन शिव जी 64 शिवलिंग के रूप में संसार में प्रकट हुए थे। जिनमें से लोग उनके 12 शिवलिंग को ही ढूंढ पाए। जिन्हें हम 12 ज्योतिर्लिंग के नाम से जानते हैं। मान्यतानुसार शिवरात्रि के दिन ही भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। भगवान शिव सभी प्रकार की मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाले माने जाते हैं। जिन लोगों के जीवन में किसी भी प्रकार की बाधाएं बनी हुई हैं। उन्हें इस दिन विधि पूर्वक व्रत के नियमों का पालन करते हुए पूजा करनी चाहिए। महाशिवरात्रि पर प्रात: काल अभिषेक करने से लाभ मिलता है। जिन लोगों की कुंडली में शनि, राहु और केतु से निर्मित कोई भी अशुभ योग बना हुआ है, दूर होता है।

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