जल-जीवन-हरियाली अभियान में छिपा है कई समस्याओं का समाधान

जल-जीवन-हरियाली अभियान में छिपा है कई समस्याओं का समाधान

                                                विशेषज्ञों की मानें तो कोरोना महामारी का पूरे विश्व में फैलना यह सभी को संदेश है कि प्रकृति के साथ ही रहना होगा, प्रकृति के साथ जीना होगा और सह अस्तित्व के सिद्धांत को स्वीकार करते हुए सबके महत्व को समझना होगा।पर्यावरण के साथ छेड़छाड़ का ही नतीजा है कि कभी तापमान ज्यादा तो कभी असमय वर्षा होती है, अधिक वर्षा से बाढ़ की स्थिति बनने के अलावे कई अन्य प्रभाव दिखने लगे हैं जिससे कृषि के साथ-साथ मानव जीवन पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव स्पष्ट तौर पर लोग महसूस कर रहे हैं। अवैध खनन, पेड़ पौधे नष्ट करना, जीवों का नाश, पराली जलाने से होने वाले नुकसान से जैव संसाधन नष्ट हुए हैं। इन दुष्प्रभावों से बचने के लिए पर्यावरण को संरक्षित करना होगा। जैव विविधता के साथ जैविक जंतु संरक्षण करना भी जरुरी है। प्रकृति में छोटे से छोटे जीव के साथ-साथ छोटे से छोटे पौधों का भी प्राचीनकाल से महत्व रहा है। सनातन काल से हमारे देश के सभी धार्मिक ग्रंथों में भी प्रकृति और जैव विविधता को पूजनीय माना जाता है। जैव विविधता के नष्ट होने से मोर, साइबेरियन पक्षी, गौरैया और गिद्ध जैसे कई अन्य पक्षी विलुप्त हो रहे हैं। साथ ही कई प्रकार के पौधे, झाड़ियों के नष्ट होने से प्राकृतिक असंतुलन स्पष्ट दिखने लगे हैं। जैविक संसाधनों का अवैज्ञानिक तौर पर दोहन हो रहा है जिसकी वजह से समस्याओं का बढ़ना आम हो गया है।

                                                पर्यावरण संरक्षण के प्रति बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की संवेदनशीलता, दूरदर्शिता का नतीजा है कि राज्य सरकार की प्राथमिकता में पर्यावरण संरक्षण सबसे ऊपर है। पर्यावरण को सुरक्षित एवं संरक्षित करने के लिए लिहाज से बिहार में वर्ष 2019 में सर्वदलीय बैठक हुई थी, जिसमें पर्यावरण संरक्षण एवं भू-जल संरक्षण के लिए ‘जल-जीवन-हरियाली’ अभियान चलाने का निर्णय लिया गया। दुनिया के धनी एवं चर्चित व्यक्ति बिल गेट्स ने बिहार में पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों की दिल्ली में जाकर प्रशंसा की थी।  राज्य सरकार जल-जीवन-हरियाली अभियान के माध्यम से अगले तीन वर्षों में 24 हजार 500 करोड़ रुपए खर्च कर रही है। इस अभियान के कार्यों से कई विभाग संबद्ध हैं। इसमें 11 अवयवों को शामिल किया गया है, जिसमें पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरुकता भी एक प्रमुख कारक है। जल-जीवन-हरियाली अभियान का मुख्य उद्देश्य जल का संरक्षण के साथ-साथ हरियाली को बढ़ावा देना है। जल-जीवन-हरियाली अभियान से तात्पर्य है जल औऱ हरियाली है तभी जीवन सुरक्षित है।

बिहार और झारखंड के अलग होने के बाद बिहार का हरित आवरण 9 फीसदी रह गया था, जबकि वन क्षेत्र 7 प्रतिशत था। इस पर गंभीरता से विचार करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हरित आवरण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2012 में हरियाली मिशन की शुरुआत करवायी, जिसमें 24 करोड़ पेड़ लगाने का लक्ष्य तय किया गया। इसके तहत अब तक 22 करोड़ पेड़ लगाया जा चुका है। राज्य का हरित आवरण अब 15 प्रतिशत हो गया है और  इसे 17 प्रतिशत तक पहुंचाने के लक्ष्य पर काम किया जा रहा है।

‘जल-जीवन-हरियाली’ अभियान के माध्यम से लोगों को पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूक भी किया जा रहा है। आनेवाली पीढ़ियों की रक्षा के लिए हम सभी का बुनियादी दायित्व है कि पर्यावरण की रक्षा करें। अधिक से अधिक वृक्षारोपण को ध्यान में रखते हुए राज्य में नर्सरी को बढ़ावा दिया जा रहा है। बागवानी कृषि के साथ ही पशुओं के संरक्षण एवं उनकी प्रजाति को स्वस्थ्य बनाए रखने के लिए राज्य सरकार कई कारगर काम कर रही है। सड़कों के किनारे वृक्षारोपण से न सिर्फ सड़कों की सुंदरता एवं उसकी सुरक्षा हो रही है बल्कि वायु प्रदूषण को भी नियंत्रित करने में सहुलियत हो रही है। सभी सार्वजनिक तालाब, आहर, पईन, पोखर के जीर्णोद्धार कराए जाने से कुछ जलीय जीवों एवं पक्षियों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी। इनके आस पास पौधे भी लगाए जा रहे हैं ताकि मनुष्य स्वच्छ वातावरण में रह सकें। जल-जीवन-हरियाली अभियान में मौसम के अनुकूल फसलचक्र अपनाने के साथ-साथ फसल अवशेष को जलाए जाने को रोकना भी शामिल है। कृषि भूमि में रासायनिक खाद, कीट पतंग, फफूंद एवं खरपतवार नाशक दवाई उपयोग करने से कृषि भूमि की मृदा शक्ति को कमजोर बना रहे हैं। इससे बचाव के लिए राज्य सरकार जैविक खेती को बढ़ावा दे रही है।

                                                प्रकृति के लगातार दोहन से कोई भी तत्व अपने मूल स्वरूप में नहीं रह गया है। ऐसी परिस्थिति में प्राकृतिक असंतुलन का होना स्वाभाविक है। ‘जल-जीवन-हरियाली’ अभियान के अगर मूल उद्देश्य है कि जीवन सुरक्षित और संरक्षित रहे।

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