नीतीश के सपनों को तराशने में जुटे हैं प्रदेश के कामगार

नीतीश के सपनों को तराशने में जुटे हैं प्रदेश के कामगार


कोरोना से पूरी दुनिया जहां दहशतगर्द है, सभी इससे उबरने की राह देख रहे हैं। देखना भी लाजिमी है। इंसान अपनी जिंदगी के लिए पल-पल जंग लड़ रहा है। जहां कल तक देश के विभिन्न प्रदेशों में दो जून की रोटी के लिए गए थे, वो अपना तथा पूरे परिवार की सुरक्षा के लिए अपने घर लौट आए हैं। लेकिन इन प्रवासी कामगारों को अपने परिवार के भरण पोषण के लिए अब बिहार से बाहर जाने की जरुरत नहीं महसूस हो रही है। क्योंकि बिहार सरकार ने इनके लिए आभाव के इस दौर में इनके लिए संसाधन मुहैया कराया है, जिसका प्रभाव अब देखने को मिल रहा है।
सूबे के मुखिया की दूरदर्शिता से देश ही नहीं दुनिया के कई देश मुरीद हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार के पश्चिम चंपारण के चनपटिया में जिन प्रवासियों को क्वारंटाइन में रखने का इंतजाम किया था, उनकी क्षमता को पहचाना और उनके लिए संसाधन मुहैया कराया तो इनलोगों ने अपनी कड़ी मेहनत और कुशल कारीगरी की बदौलत एक ऐसी मिसाल पेश कर दी जो देश और दुनिया के लिए नजीर बन गई है। इनके द्वारा बनाए गए सामानों के ग्राहक अब बड़ी कंपनियां बनने लगी हैं। चनपटिया के नवप्रवर्तन स्टार्टअप जोन में नोएडा, सूरत, लुधियाना, दिल्ली, अमृतसर, जैतपुर (गुजरात), कतर आदि जगहों से लॉकडाउन के दौरान बिहार वापस आये हुनरमंद लोगो द्वारा उद्यम कार्यों का ही नतीजा है कि इस इलाके में आर्थिक खुशहाली घरों में लौट आयी है। बिहार सरकार ने इनके लिए यहीं रोजगार के अवसर पैदा करने की जो बातें कही थी उसे सार्थक कर दिखाया है। इतना ही नहीं इन प्रवासी कारीगरों की कार्यशैली का जाकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्वयं मुआयना तो किया ही इनकी हौसलाजाई भी किया औऱ यह भी कहा कि यह एक जिले तक ही सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरे बिहार में इस योजना को प्रभावी बनाया जाएगा, जिससे लोगों को रोजगार भी मिलेगा और अपना प्रदेश भी विकसित प्रदेशों में शुमार होगा।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कोरोना काल में लॉकडाउन के दौरान काफी तादाद में जो लोग बिहार आये उनके लिए सरकार कोशिश कर रही है कि किसी को भी मजबूरी में बिहार से बाहर जाना नहीं पड़े, कोई अगर अपनी स्वेच्छा से जाना चाहता है तो वो उनका अधिकार है। नीतीश सरकार ने बाहर से आने वाले लोगों को क्वारंटाइन सेंटरों पर रखा और उनलोगों के लिए बिहार में ही रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए औद्योगिक नीति में बदलाव किया। इस औद्योगिक नीति में नया प्रावधान जोड़ा गया कि जो लोग बाहर से आयेंगे उनको यहां पर काम शुरु करने को लेकर मदद की जायेगी। बाहर से आने वाले कई लोगों ने यहां पर काम करने की इच्छा व्यक्त की। नई पॉलिसी के तहत कई जगहों पर काम शुरु किया गया। यहां के उत्पाद को बिहार और देश के बाहर भी भेजा जा रहा है, जो एक बड़ी उपलब्धि है।
बिहार में उद्योग को बढ़ाना देने के लिए नीतीश कुमार ने ग्राउंड लेबल पर काम करना शुरु किया। कौन क्या कहता है इसकी कभी परवाह नहीं की और जमीनी स्तर पर लगातार काम करते रहे इसी का नतीजा है कि बिहार में बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य, स्कूलों की पक्कीकरण से लेकर नदी, तालाब, पोखर, कुओं का जीर्णोद्धार हुआ। 22 करोड़ से ज्यादा पौधों को लगाकार पर्यावरण को सुरक्षित करने का काम किया। नतीजा आपके सामने है, कि बिहार में समय पर वर्षा, गर्मी और जाड़े का प्रभाव देखने को मिल रहा है। साथ ही बिहार में बाहर से आए बिहारी प्रवासियों के लिए संसाधन मुहैया कराकर बिहार के लोगों को आर्थिक रुप से संपन्न करने में जुटे हुए हैं साथ ही लोगों के लिए लगातार रोजगार भी सृजित करने की मुहिम में लगे हुए हैं।

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