पटना में बिना ऑपरेशन थिएटर के लाइसेंस के आंख अस्पताल में किया जा रहा आंख का ऑपरेशन, प्रशासन अंजान

पटना में बिना ऑपरेशन थिएटर के लाइसेंस के आंख अस्पताल में किया जा रहा आंख का ऑपरेशन, प्रशासन अंजान

  • बसंत सिन्हा

पटनाः राजधानी में कुकुरमुत्तों की तरह अवैध तरीके से दर्जनों नर्सिग होम चलाया जा रहा है। इस सबसे सरकार व स्वास्थ्य विभाग अंजान बना हुआ है। इसका फायदा नर्सिग होम के संचालक उठा रहे हैं। ऐसे लोगों भोली जनता को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ दिलाने के नाम पर काफी रुपया ऐठ भी लेते हैं। साथ ही जब मरीज का स्थिति सुधरने के बजाय और बिगड़ जाता है तो रेफर कर दिया जाता है। जानकारों का मानना है कि अवैध तरीके से नर्सिग होम संचालित होने से वहां पर चिकित्सक व स्वास्थ्यकर्मी अनट्रेड होते हैं। ऐसे में मरीजों के उपचार में खिलवाड़ किया जाता है। ऐसा ही एक मामला प्रकाश में आया है। आंख का ऑपरेशन फुलवारी शरीफ में फुलवारी आंख अस्पताल में खुलेआम चलाया जा रहा है।
मरीजों के आंख का ऑपरेशन भी लगातार किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के जानकारों का कहना है कि उक्त अस्पताल में बिना मानक के ऑपरेशन का कार्य किया जा रहा है। अस्पताल में मरीज को आने को लेकर तरह तरह की आकर्षक स्लोगन दिया गया है। ताकि मरीजों जाल में फंस जाय। साथ ही दूसरे प्रदेश के अच्छे- अच्छे डाक्टरों के द्वारा ऑपरेशन की बातें बताई जा रही है। साथ ही अस्पताल में मरीज को लाने को लेकर बिचौलिया भी काफी सक्रिय हैं।
पटना के सुदूर देहातसे मरीजों को ट्रस्ट के नाम पर लाकर यहां मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया जा रहा है। इस बावत सिविल सर्जन को शिकायत भी किया गया। बावजूद सिविल सर्जन कार्यालय में शिकायत के बाद भी अस्पताल प्रशासन खुलेआम आंख का ऑपरेशन कर रहा है।
जानकारों का कहना है कि अस्पताल में मौजूद डॉक्टर इस संबंध में किसी भी तरह की जानकारी देने से परहेज करते नजर आते है।

वहीं, विभाग के लोग भी इसको लेकर अंजान बनने की बात करते है, निश्चित तौर पर जिस तरह राजधानी पटना में शिकायत के बावजूद बिना रजिस्ट्रेशन के फुलवारी आंख अस्पताल का संचालन पटना के फुलवारी शरीफ गोलम्बर के पास किया जा रहा है। उससे साफ है कि विभागीय पदाधिकारी के मिलीभगत से इसका संचालन हो रहा है, जो कि गलत है। खबर लिखने तक सिविल सर्जन कार्यालय के द्वारा कोई कार्रवाई फुलवारी आंख अस्पताल के प्रबंधन पर नही की गई है। अब देखना है कि शिकायत को लेकर सिविल सर्जन कार्यालय क्या रूख अख्तियार करती है। बहरहाल मामले को दबाने के लिए अस्पताल संचालक के द्वारा विभाग का चक्कर लगा रहें हैं। इधर, सिविल सर्जन से बार बार प्रयास करने के बावजूद बात नहीं हो पाई है।

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