पीएम किसान योजना की 7वीं किस्त जारी, 9 करोड़ किसानों के खाते में 18 हजार करोड़ अंतरित

पीएम किसान योजना की 7वीं किस्त जारी, 9 करोड़ किसानों के खाते में 18 हजार करोड़ अंतरित

पीएम मोदी ने देश के 6 राज्यों के लाखों किसानों के साथ वर्चुअल चर्चा भी किया

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किसानों के खाते में पीएम किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत 9 करोड़ किसानों के खाते में 18000 करोड़ रुपये को अंतरित किया। यह पीएम किसान योजना की 7वीं किस्त हुई जारी। इसके तहत इसके अलावा किसान आंदोलन के ध्यान में रखते हुए पीएम मोदी देश के 6 राज्यों के लाखों किसानों के साथ वर्चुअल चर्चा भी किया। उन्होंने किसानों से बातचीत के दौरान कहा कि छोटे किसानों को भी समझाएं और किसानों के लिए जो बैंकों से ऋण दिया जा रहा है।
क्रिशमश की देशवासियों को बधाई देने के बाद गीता जयंती की बधाई दी, पंडित महामना मदन मोहन मालवीय के जन्मदिन भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी के जन्मदिन की बधाई दी। सुशासन को, गुड गव्रनेंस को अटल जी ने बढ़ावा दी, गांव और गरीब को प्राथमिकता दी। आज पूरा देश उनको स्मरण कर रहा है, नमन कर रहा है।
पीएम किसान योजना के माध्यम से केंद्र की मोदी सरकार किसानों के खातों में हर चार महीने में 2 हजार रुपये की किस्त जमा करती है। एक साल में कुल 6 हजार रुपये किसानों खातों में भेजे जाते हैं। यह योजना 1 दिसंबर, 2018 को लागू हुई थी। यह पैसा सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाता है। अटल जी ने किसान और गरीबों के लिए योजनाओं में होने वाली भ्रष्टाचार को रोग मानते थे। अटल जी ने पूर्व की सरकारों के लिए कहा था कि रुपया चलता है तो घिसता और हाथ में लगता है और धीरे से जेब में चला जाता है। आज जो पैसा निकलता है वो सीधे उसके खाते में चला जाता है। पीएम किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत 9 करोड़ किसानों के खाते में 9 करोड़ किसानों के खाते में 18000 करोड़ रुपये से ज्यादा भेज दी गई गई है। यही तो गुडगवर्नेंस है। देश के सभी किसानों को इसका लाभ मिल रहा है। एक मात्र पश्चिम बंगाल सरकार के राजनीतिक कारणों की वजह से वहां के 70 लाख से ज्यादा किसान को इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। कई किसानों ने अर्जियां दी है, लेकिन वहां की सरकार ने रोक कर रख दिया है। जो लोग 30 सालों तक राज करते थे, उन्होंने कहां पहुंचा दिए हैं। ममता जी के 15 वर्ष पुराने भाषण सुनेंगे तो सब पता चल जाएगा। बंगाल आपकी धरती है तो किसानों को न्याय देने के लिए पीएम किसान योजना के लिए आंदोलन क्यों नहीं किया।
जो दल पश्चिम बंगाल के हित में नहीं बोलते वो दिल्ली पर कुछ नहीं बोलते, देश की अर्थ नीति को बर्बाद करने में लगे हुए हैं। बस इवेंट मैनेजमेंट कर बड़ी-बड़ी हेडलाइन बन रहे हैं। लोकतंत्र के किसी पारामीटर को मानने को तैयार नहीं हैं। किसानों के नाम जो खेल खेल रहे हैं उनको सुनना पड़ेगा। अखबारों और मीडिया में जगह बनाकर राजनीति में स्थापित होने की जड़ी बुटी खोज रहे हैं। आपका हक है मगर गरीब किसानों को गुमराह और भ्रमित नहीं करें। जो वर्षों सत्ता में रहे उन्होंने छोटे किसानों को बर्बाद किया। फसल बीमा का भी लाभ छोटे किसानों को नहीं मिल पाता था। बिजली, पानी के लिए तरसते थे। इन छोटे किसानों की संख्या छोटी नहीं है 80 प्रतिशत किसान हैं जो 10 करोड़ से ज्यादा इनकी संख्या है। चुनाव होते रहे, सरकार बनती रही, आयोग बनते रहे, मगर किसानों के हालात नहीं बदला। क्या इस स्थिति को बदलना जरुरी नहीं थी। 2014 में आयी हमारी सरकार ने नई एप्रोच के साथ काम करना शुरु किया। किसानों के समृद्दि के कई देशों की चर्चाएं सुनता रहता था, फिर हमने अध्ययन किया फिर लक्ष्य बनाया और एक साथ काम किया कि देश के किसानों का होने वाला खर्च कम हो। हमने काम किया माइक्रो एरिगेशन, डीप एरिगेशन को भी बढावा दिया। एमएसपी का बहुत कम प्रचार होता था, आज रिकॉर्ड खरीद हो रही है। जो आज किसानों के नाम पर राजनीति कर रहे हैं ये उस सरकार के हिस्सेदार थे। यही लोग स्वामीनाथन कमेटी के उपर बैठ गए थे। फसल बेचने के लिए किसानों को बाजार मिलनी चाहिए, मंडियों को ऑनलाइन जोड़ा जिससे किसान ऑनलाइन बेच रहे हैं। छोटे किसानों के एक समूह बनाया जो ताकत बनें उसी का नतीजा है 10 हजार से ज्यादा एफपीओ बनाया जा रहा है। गांव के पास ही भंडारण की व्यवस्था हो। मछली, डेयरी पालन और अन्य को बढ़ावा दिया जा रहा है। ढाई करोड़ से ज्यादा किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड दिया है। खेती से जुड़े लोगों के लिए एक और लक्ष्य पर काम किया और किसानों के दरवाजे पर पहुंचकर छोटे औऱ सीमांत किसान को घर, शौचालय, बिजली और गैस के मुफ्त कनेक्शन दिए जा रहे हैं। हर साल आयुष्मान के माध्यम से 5 लाख रुपए इलाज के लिए दिए जा रहे हैं। 90 पैसे प्रतिदिन पर बीमा की योजना, 60 वर्ष की उम्र के बाद 3000 पेंशन कि व्यवस्था की गई है। गांव के किसानों को बैंक से ऋण दिए जा रहे हैं। आधुनिकता के इस दौर में कृषि को आगे बढ़ाना ही होगा, सरकार कदम से कदम मिलाकर चलने को तैयार है। आप जहां चाहें वहां अपने उपज को बेच सकते हैं, निर्यात करना चाहते हैं कर सकते हैं, पूरे गांव के किसान को एफपीओ के माध्यम से इक्ट्ठा कर बेचना चाहते हैं, वो भी कर सकते हैं। खरीददार को किसान को तीन दिन के अंदर भुगतान करना होगा, इसके लिए कानून के माध्यम से किसान पैसा प्राप्त कर सकते हैं। किसानों के साथ एग्रीमेंट करने वाले लोग अच्छे बीज, उपकरण, विशेषज्ञताएं उपलब्ध कराएगा, इसी के अनुरुप काम करने में किसान को मदद करेगा। अगर किसी वजह से किसान की उपज अच्छी नहीं होती या फिर बर्बाद हो जाती है जिसने भी एग्रीमेंट किया है उसको भी निर्धारित रकम देना ही होगा, साथ ही बेहतर उपज पर बोनस भी देना होगा किसानों को। एग्रीमेंट करने वाला अपने मर्जी से इसको खत्म नहीं कर सकता है, जबकि किसान एग्रीमेंट खत्म कर सकता है। दुनिया में सबसे ज्यादा दुग्ध उत्पादन करने वाला देश भारत है।

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