बिहार में टेलीमेडिसिन की शुरुआत, सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले मरीजों को वीसी के माध्यम से मिलेगी चिकित्सकीय परामर्श

बिहार में टेलीमेडिसिन की शुरुआत, सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले मरीजों को वीसी के माध्यम से मिलेगी चिकित्सकीय परामर्श

  • टेलीमेडिसिन के जरिए स्वास्थ्य उपकेंद्र को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र/ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, अनुमंडल अस्पताल एवं जिला अस्पताल से जोड़ा जाएगा। टेलीमेडिसिन के अंतर्गत सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले जनमानस के लोगों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराया जाएगा।
  • वन्डर कार्यक्रम के तहत गर्भवती महिलाओं को इलाज में काफी सुविधा होगी। इसका शुभारंभ दरभंगा से हो गया है और प्रथम चरण में इसे अन्य जगहों से भी शुरु किया जाएगा।
  • रेफरल ट्रांसपोर्ट ट्रैकिंग सिस्टम की शुरुआत हो गई है। इसके माध्यम से एंबुलेंस सेवा का बेहतर लाभ लोगों को अब मिल सकेगा।
  • अश्विन पोर्टल की शुरुआत की गई है, जिससे आशा कार्यकर्ताओं को समय पर पैसा उनके अकाउंट में चला जाएगा।
  • पंचायत और प्रखंड स्तर तक अभियान चलाकर लोगों को स्वास्थ्य के क्षेत्र में दी जा रही सुविधाओं  के बारे में जानकारी दें। उन्हें बताएं कि नई तकनीक का कैसे सुविधाएं प्राप्त करें।
  • दीदी की रसोई कार्यक्रम के संचालन हेतु एमओयू पर हस्ताक्षर भी किया गया है जिससे सभी अनुमंडलीय अस्पतालों में दीदी की रसोई स्थापित किया जा सकेगा, जिससे लोगों को नास्ता एवं भोजन की सुविधा ससमय उपलब्ध हो सकेगी।
  • हमलोगों ने संकल्प लिया कि बिहार में स्वास्थ्य का ऐसा प्रबंध करेंगे कि किसी को मजबूरी में इलाज के लिए बिहार से बाहर जाना नहीं पड़े।

पटना: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित संवाद में आत्मनिर्भर बिहार के सात निश्चय पार्ट-2 के तहत ग्रामीण इलाकों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने हेतु टेलीमेडिसिन तथा अन्य सुविधाओं का माउस के माध्यम से शुभारंभ किया।

मुख्यमंत्री के समक्ष जीविका संपोषित दीदी की रसोई का राज्य स्वास्थ्य समिति बिहार के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किया गया। ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री बाला मुरुगन डी एवं राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक श्री मनोज कुमार ने एमओयू पर हस्ताक्षर किये।

इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सबसे पहले स्वास्थ्य विभाग को इस बात के लिए बधाई देता हूं कि आज उन्होंने अनेक कार्यक्रमों की शुरुआत कर दी है। स्वास्थ्य मंत्री एवं प्रधान सचिव स्वास्थ्य ने इसके संबंध में विस्तृत जानकारी आपलोगों को दी है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में नई प्रगति हो रही है, जिससे आप सभी लोग अवगत हुए हैं। उन्होंने कहा वर्ष 2005 में हमलोगों को सरकार में काम करने का मौका मिला। उसके पहले स्वास्थ्य के क्षेत्र में किया स्थिति थी, आप सभी अवगत हैं। वर्ष 2006 के फरवरी में हमलोगों ने पहला सर्वे कराया, जिसमें यहा जानकारी मिली की प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रतिमाह इलाज के लिए सिर्फ 39 मरीज पहुंचते हैं। हमलोगों ने स्वास्थ्य सेवा को बेहतर करने के लिए डॉक्टर्स, स्वास्थ्यकर्मियों को पदस्थापित किया गया। जरुरत के अनुसार नियोजन, नियुक्ति की गई, साथ ही दवा का भी प्रबंध कराया गया। उसके बाद वर्ष 2006 के अंतिम माह में पुनः सर्वे कराया गया जिसमें यह जानकारी मिली की प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर अब इलाज के लिए 1 हजार से 15 सौ लोग पहुंचने लगे हैं। सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर लैंड लाइन की व्यवस्था करायी गई और मुख्यमंत्री सचिवालय से सभी चीजों की सतत निगरानी की गई। वर्ष 2018 की रिपोर्ट के अनुसार पूरे बिहार में एक माह में औसतन 10 हजार मरीज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर इलाज के लिए पहुंचने लगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि एक सर्वे की रिपोर्ट से पता चला कि बिहार में गरीब परिवारों का उनकी आमदनी में सबसे ज्यादा खर्च उसके इलाज पर हो जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए लोगों के इलाज की बेहतर व्यवस्था के लिए तेजी से काम किया। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को कम्युनिटी हेल्थ सेंटर के रुप में परिणत किया जा रहा है, जहां 30 बेड की व्यवस्था की गई है। अनुमंडल अस्पतालों में 75 बेड की व्यवस्था की गई है। सभी अस्पतालों के बिल्डिंग को भी ठीक किया जा रहा है।

नई टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जा रहा है। आत्मनिर्भर बिहार के सात निश्चय पार्ट-2 में सभी स्वास्थ्य केंद्रों को अनुमंडल अस्पतालों एवं जिला अस्पतालों लिंक कर देंगे और वहीं पर सारी सुविधाएं उपलब्ध करायी जाएंगी और जरुरत के अनुसार मरीजों का बेहतर इलाज किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि धीरे-धीरे सभी स्वास्थ्य केंद्रों को और विकसित किया जाएगा। टेलीमेडिसिन के जरिए स्वास्थ्य उपकेंद्र को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र/ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, अनुमंडल अस्पताल एवं जिला अस्पताल से जोड़ा जाएगा। टेलीमेडिसिन के अंतर्गत सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले जनमानस के लोगों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराया जाएगा। मरीजों का इलाज होगा और उनके लिए दवा भी उपलब्ध रहेगी। मैं इस बात के लिए आप सबका अभिनंदन करता हूं कि आपलोगों ने इस काम को तेजी से शुरु कर दिया है। लाभार्थियों एवं स्वास्थ्यकर्मियों ने इस संबंध में बातचीत के जरिए जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वन्डर कार्यक्रम के तहत गर्भवती महिलाओं को इलाज में काफी सुविधा होगी। इसका शुभारंभ दरभंगा से हो गया है और प्रथम चरण में इसे अन्य जगहों से भी शुरु किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा कई महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं जिसकी जानकारी लोगों को सोशल मीडिया के माध्य्म से भी बताएं। मीडिया के माध्यम से भी जानकारी दें। पंचायत और प्रखंड स्तर तक अभियान चलाकर लोगों को स्वास्थ्य के क्षेत्र में दी जा रही सुविधाओं  के बारे में जानकारी दें। उन्हें बताएं कि नई तकनीक का कैसे सुविधाएं प्राप्त करें।

उन्होंने कहा कि रेफरल ट्रांसपोर्ट ट्रैकिंग सिस्टम की शुरुआत हो गई है। इसके माध्यम से एंबुलेंस सेवा का बेहतर लाभ लोगों को अब मिल सकेगा। लोग ससमय अस्पताल पहुंच पाएंगे। एंबुलेंस कहां है उसमें कौन मरीज है, कहां है, कहां जाना है, किसको ला रहे हैं, कहां ले जाना है सबकी जानकारी मिल जाएगी। उन्होंने कहा कि अश्विन पोर्टल की शुरुआत की गई है, जिससे आशा कार्यकर्ताओं को समय पर पैसा उनके अकाउंट में चला जाएगा।

उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले पूर्णिया के धमदाहा में जाकर हमने देखा कि आशा की दीदियां एक मरीज के लिए 100 रुपया में नास्ता एवं खाना उपलब्ध करा रही हैं, हमने कहा इसे बढ़ाकर 150 रुपया कर दिया जाए। आज दीदी की रसोई कार्यक्रम के संचालन हेतु एमओयू पर हस्ताक्षर भी किया गया है जिससे सभी अनुमंडलीय अस्पतालों में दीदी की रसोई स्थापित किया जा सकेगा, जिससे लोगों को नास्ता एवं भोजन की सुविधा ससमय उपलब्ध हो सकेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2006 में मुजफ्फरपुर में दो स्वयं सहायता समूह के लोगों से हमने बात किया। उसके बाद हमलोगों ने तय किया कि स्वयं सहायता समूह को और बेहतर बनाएंगे। वर्ल्ड बैंक से कर्ज लेकर  44 ब्लॉक में हमने जीविका की शुरुआत करायी थी। उसके बाद पूरे बिहार में इसका विस्तार हो गया। गया की जीविका दीदियों से बातचीत किया तो बैंक के बारे में ऋण, लेन देन से संबंधित उनकी जानकारी को देखकर मैं अचंभित हुआ और मुझे बेहत खुशी भी हुई कि वे पढ़ी लिखी नहीं हैं उसके बाद भी इतनी बढ़िया जानकारी इन्हें है। हम समय समय पर जीविका समूह के सभी कामों को जगह-जगह जाकर देखते रहे हैं। उन्होंने कहा कि 10 लाख जीविका समूहों का गठन किया गया। 1 करोड़ 20 लाख परिवार की महिलाएं जीविका से जुड़ गई हैं। बिहार की आर्थिक स्थिति में सुधार में जीविका की दीदियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। तत्कालीन केंद्र की यूपीए की सरकार ने बिहार की जीविका को आजीविका नाम से पूरे देश में चलाया। सोशल मीडिया पर भी आपलोग सकारात्मक बातों को बताने का काम कीजिए। स्वास्थ्य विभाग का दायित्व है कि पहले और आज के कामों को नई पीढ़ी को बताने की जरुरत है।

उन्होंने कहा कि जिन बच्चे-बच्चियों के हार्ट में छेद हो उनके इलाज के लिए राज्य सरकार अपने खर्चे से गुजरात के अहमदाबाद में मुफ्त में होने वाली इलाज हेतु भेजेगी। इसके साथ-साथ बिहार के अस्पतालों में ऐसे बच्चे-बच्चियों के इलाज की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने कहा कि जब हम सांसद थे बिहार के लोगों के एम्स में इलाज और उनके रहने की व्यवस्था करवाते थे। हमलोगों ने संकल्प लिया कि बिहार में स्वास्थ्य का ऐसा प्रबंध करेंगे कि किसी को मजबूरी में इलाज के लिए बिहार से बाहर जाना नहीं पड़े। अगर कोई अपनी इच्छा से इलाज के लिए बाहर जाना चाहते हैं तो अलग बात है।

उन्होंने कहा कि कोरोना के मामले में भी राज्य में बहुत काम हो रहा है। हमारे यहां पूरे देश में जितना टेस्ट हुआ है उससे 10 प्रतिशत अधिक टेस्ट हो रहा है। 10 लाख की आबादी पर जो देश में औसतन कोरोना जांच हो रही है उससे 21 हजार से अधिक जांच बिहार में हो रही है। वैक्सीनेशन दो खंडों के लोगों का होना शुरु हो गया है। कल नीति आयोग की बैठक थी, प्रधानमंत्री जी से हमलोगों ने चर्चा की। अगले माह से सभी का वैक्सीनेशन शुरु हो जाएगा। अगले चरण में 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों और 50 वर्ष से कम उम्र के गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों का टीकाकरण कराया जाएगा। सभी से कहूंगा कि टीका जरुर लगवाएं। कोरोना से निश्चिंत होने की जरुरत नहीं है सचेत रहना, सजग रहना है। उन्होंने कहा कि पल्स पोलियो अभियान बिहार में जिस प्रकार चलाया गया उससे पोलियो से छूटकारा मिली। सभी जगह इसकी प्रशंसा हुई। बिल गेट्स जी बिहार के खगड़िया के इलाके में जाकर पल्स पोलियो टीकाकरण देखे थे। उन्होंने कहा कि बिहार के लोग बेहतर काम करते हैं उसी का नतीजा है सब काम अच्छा होता है। बिहार को इतना आत्मनिर्भर बनाना है की देश को विकसित करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सके।

मुख्यमंत्री का स्वागत स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत ने पुष्प भेंटकर किया। मुख्यमंत्री ने ई-संजीवनी के लाभार्थियों एवं स्वास्थ्यकर्मियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बातचीत की, जिसमें पटना जिले के पैमाल हेल्थ सब सेंटर से एएनएम माया कुमारी, पोठही की लाभार्थी रीना सिन्हा, नालंदा जिले के दीपनगर हेल्थ सब सेंटर की एएनएम पूनम कुमार तथा सिवान जिले के बरहरिया हेल्थ सबसेंटर की एएनएम नीतू कुमारी शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ने वन्डर पोर्टस, रेफरल ट्रांस्पोर्ट ट्रैकिंग सिस्टम, अश्विन पोर्टल का माउस के जरिये शुभारंभ किया।

राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार ने ई-संजीवनी तथा रेफरल ट्रांस्पोर्ट ट्रैकिंग सिस्टम का प्रस्तुतीकरण दिया।

ग्रामीण विकास के सचिव बाला मुरुगन डी ने दीदी की रसोई पर एक प्रस्तुतीकरण दिया।

कार्यक्रम के दौरान वन्डर पोर्टल पर आधारित एक वृतचित्र भी दिखाया गया।

मुख्यमंत्री ने ई-संजीवनी के लिए बेहतर कार्य करने वाले राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार, राज्य स्वास्थ्य समिति के अपर कार्यपालक निदेशक केश्वेंद्र कुमार, डॉ करुणा कुमारी, हेमंत कुमार, सतीश रंजन सिन्हा, शैलेश कुमार श्रीवास्तव तथा हेमंत साह को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।

कार्यक्रम को उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद, उपमुख्यमंत्री रेणु देवी, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय, स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत ने भी संबोधित किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार, ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव अरविंद कुमार चौधरी, मुख्यमंत्री के सचिव अनुपम कुमार, ग्रामीण विकास विभाग के सचिव बाला मुरुगन डी, राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार, राज्य स्वास्थ्य समिति के अपर कार्यपालक निदेशक केश्वेंद्र कुमार सहित अन्य वरीय पदाधिकारीगण, जीविका दीदियां एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। जबकि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारी एवं स्वास्थ्यकर्मी जुड़े हुए थे।

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