वीर कुंवर सिंह विवि आरा की जमीन को मेडिकल कॉलेज के लिए हस्तांतरित किये जाने का विरोध जारी

वीर कुंवर सिंह विवि आरा की जमीन को मेडिकल कॉलेज के लिए हस्तांतरित किये जाने का विरोध जारी

सुरेंद्र सागर/ आरा

बिहार सरकार द्वारा वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय आरा की 25 एकड़ जमीन मेडिकल कॉलेज के लिए हस्तांतरित किए जाने का मामला लगातार विवादों की भेंट चढ़ने लगा है।

भोजपुर सहित पुराने शाहाबाद जनपद के छात्रों,युवाओं, शिक्षको,बुद्धिजीवियों,अधिवक्ताओं,व्यवसायियों,सामाजिक एवं राजनैतिक कार्यकर्ताओ सभी वर्गों के बीच  विवि की जमीन को मेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए हस्तांतरित किये जाने का विरोध जारी है।

राज्य सरकार ने वीर कुंवर सिंह विवि की 25 एकड़ जमीन को मेडिकल कॉलेज के लिए दे दी है और इसके लिए सरकार ने कैबिनेट से स्वीकृति दे चुकी है।कैबिनेट की मुहर लगने के बाद इस भूखंड को वापस विवि को दिए जाने को लेकर संवैधानिक संकट खड़ा हो गया है।बिहार सरकार के सामने भी कैबिनेट के फैसले को पलटना बड़ी चुनौती मानी जा रही है।

इधर शाहाबाद जनपद के लोग विवि की जमीन को किसी भी कीमत पर हाथ से जाने देना नही चाहते और आंदोलन की राह पर उतर आए हैं।

राज्य सरकार ने विवि की 25 एकड़ जमीन मेडिकल कॉलेज के लिए हस्तांतरित कर दी है और इसके बदले 25 एकड़ जमीन कोइलवर में उपलब्ध करा दी है है।अब सरकार के फैसले के बाद विवि की जमीन दो टुकड़ों में विभक्त हो गई है और दोनों भूखंड की दूरी में करीब 20-22 किलोमीटर की दूरी है।

विवि के लिए दोनों भूखंडों के बीच की दूरी भी विवि की यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन की मान्यता पर प्रश्न चिन्ह खड़ा कर दिया है।इस बात को लेकर भी लोगो मे विवि की जमीन के हस्तांतरण को लेकर आक्रोश है।

बता दें कि स्वतंत्रता संग्राम के महायोद्धा वीर बांकुड़ा बाबू कुंवर सिंह के नाम पर इस जनपद के लोगो ने लम्बा संघर्ष कर विवि बनवाया था।

वीर कुंवर सिंह के नाम पर आरा में विवि की स्थापना के लिए जब आंदोलन चरम पर पहुंचा तो अंततः बिहार सरकार को यहां विवि निर्माण का फैसला लेना पड़ा और फिर  22 अक्टूबर 1992 को स्वतंत्रता संग्राम के महानायक के नाम पर विवि की स्थापना हुई और शाहाबाद में स्वाभिमान,संघर्ष और नायक का प्रतीक बने वीर बांकुड़ा बाबू कुंवर सिंह को सच्ची श्रद्धांजलि देने के फैसले पर भी बिहार सरकार ने मुहर लगाई।

विवि की स्थापना के बाद प्रथम कुलपति प्रो.डॉ. सुरेन्द्र नाथ सिंह ने एक एक टेबल,एक एक कुर्सी का इंतजाम कर विवि की आधारभूत संरचना को मजबूत करने का प्रयास शुरू किया।भोजपुर के बड़हरा प्रखण्ड के एकौना गांव के रहने वाले और देश के जाने माने  चर्चित साहित्यकार कलक्टर सिंह केसरी के परिवार से नाता रखने वाले प्रथम कुलपति श्री सिंह को स्थानीय लोगो का भी भरपूर सहयोग और समर्थन मिला और धीरे धीरे यह विवि विकास के रास्ते पर चल पड़ा।

नतीजा हुआ कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने 6 मई 2006 को इस विवि को सभी मापदंडों को पूरा करने को देखते हुए अपनी तरफ से 12 बी के तहत मान्यता प्रदान कर दी।

विश्वविद्यालय अनुदान से मान्यता मिलने के बाद इस विवि को 20 अक्टूबर 2008 को एक एक टीम भेजकर यूजीसी ने ग्यारहवें वित्त योजना(2007-12) के तहत  करोड़ो रूपये की राशि भेजी जिससे इस विवि के विकास को नई उड़ान मिलनी शुरू हो गई।

तब से लेकर आज तक यह विवि विकास की ऊंचाइयों पर नित्य नए आयाम तय करने में जुटा हुआ है।

विवि ने कृषि विभाग की पुरानी जगह से जीरो माइल स्थित नए कैम्पस तक पहुंच गया और वहां भी विवि के परीक्षा विभाग,बीएड विभाग सहित कई आधारभूत संरचनाएं खड़ी होने लगी कि इसी बीच यहां की 25 एकड़ भूमि को काटकर मेडिकल कॉलेज के लिए सरकार ने दे दिया।

सबसे पहले विवि की जमीन को बचाने के लिए कुलपति प्रो. देवी प्रसाद तिवारी ने सक्रियता दिखाई और उन्होंने इस मामले को सिंडिकेट की बैठक में ले जाकर एलान कर दिया कि इस जमीन को बचाने के लिए हम हर सम्भव प्रयास करेंगे।

उसके बाद छात्र संगठन,शिक्षक संघ,सामाजिक और राजनैतिक दलों के प्रतिनिधि भी आगे आये और विवि की जमीन को बचाने का आंदोलन जारी है।

वीर कुंवर सिंह विवि के पूर्व सीनेट सदस्य अजय कुमार तिवारी उर्फ मुनमुन ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को एक पत्र भेजा है जिसमे यूजीसी की मान्यता सम्बन्धी पत्रों,नार्म्स और अनुदान की चर्चा की है और कहा है कि मेडिकल कॉलेज बने इसका जनपद में स्वागत है किंतु वीर कुंवर सिंह के नाम पर जनपद के लोगो के लंबे संघर्ष की बुनियाद पर  बने विवि की जमीन को काटकर बने यह स्वीकार नही है।

विवि की भूमि मेडिकल कॉलेज के लिए दे दिए जाने के बाद विवि की यूजीसी के 12 बी की मान्यता पर खतरा मंडराने लगा है और यूजीसी से इस विवि मान्यता छीनी तो विवि का विकास अवरुद्ध हो जाएगा।

उन्होंने मुख्यमंत्री से इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए विवि की 25 एकड़ जमीन को लौटाने की मांग की है और मेडिकल कॉलेज के लिए भोजपुर में ही किसी अन्य जगह का चयन कर दिए जाने की मांग की है।

फिलहाल मेडिकल कॉलेज के लिए वीर कुंवर सिंह की जमीन को हस्तांतरित करने का मामला लगातार तूल पकड़ते जा रहा है।

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