सरकार स्कूली शिक्षा से ही प्राइमरी हेल्थ केयर को शामिल करें : डॉ. रणबीर नंदन

सरकार स्कूली शिक्षा से ही प्राइमरी हेल्थ केयर को शामिल करें : डॉ. रणबीर नंदन

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पटनाः जनता दल यूनाइटेड के विधान पार्षद डॉ. रणबीर नंदन ने कहा आपदा की तरह ही हमें अब महामारी को देखने की जरूरत है। इसके लिए स्कूल स्तर पर ही शिक्षा के स्तर में बदलाव की जरूरत है। सैद्धांतिक रूप से हम किसी भी बीमारी से निपटने की जानकारी तो बच्चों को देते हैं, अब प्रायोगिक तौर पर इन बीमारियों की स्थिति में प्राथमिक तौर पर उठाए जाने वाले कदमों के बारे में भी जानकारी देना शुरू करना होगा। कोरोना संक्रमण की इस दूसरी लहर ने हमें यह सीख दी है कि कोई भी सिस्टम इतनी बड़ी आपदा को अपने स्तर पर झेल पाने में सक्षम नहीं होने वाला है। इसके लिए मास लेबल पर काम किए जाने की जरूरत है।

प्रो. रणबीर नंदन ने कहा कि बुनियादी शिक्षा में ही हमें इंफेक्शन से होने वाली बीमारियों से निपटने के तरीकों को शामिल करना होगा। बच्चों को स्वच्छता और प्राथमिक उपचार की शिक्षा देनी होगी। आठवीं कक्षा के बाद के बच्चों को जीवन विज्ञान की पढ़ाई करानी शुरू कर दी जाती है। उन्हें इंजेक्शन देने, ऑक्सीजन चढ़ाने, ऑक्सीजन लेबल चेक करने, बुखार का स्तर जांचने, ब्लड प्रेसर जांचने, ब्लड टेस्ट जैसी मूल जानकारी देना शुरू करना होगा। हमें एक ऐसा फोर्स तैयार करना होगा, जो घर में किसी के भी बीमार होने की स्थिति में उसकी समुचित देखभाल कर सके। इसके लिए स्कूल व कॉलेज के सिलेबस में इन चीजों को शामिल करने की जरूरत है। इस प्रकार की प्रायोगिक ट्रेनिंग से ही पैनिक जैसी स्थिति से निजात मिल सकेगी।

प्रो. नंदन ने कहा कि हर घर के स्तर पर अगर पारा मेडिकल ट्रेनिंग रहेगी तो इसका बड़ा असर देखने को मिलेगा। लोग सामान्य इंफेक्शन की स्थिति में हॉस्पिटल जाने से बचेंगे। इससे कोरोना महामारी के दौर में अस्पतालों पर दबाव कम होगा। कोरोना ने हमें दिखाया है कि लगभग 98 फीसदी मरीजों का उपचार होम आइसोलेशन में हो रहा है। बस उन्हें प्रॉपर केयर की जरूरत है। स्कूल एवम कॉलेज स्तर पर ट्रेनिंग हासिल किए छात्र इस कार्य में आगे आकर इस महामारी में राहत ला सकते हैं। इसके लिए सरकार अविलंब योजना बनाये। आज, अस्पतालों में बेड की कमी है। डॉक्टर मरीजों का इलाज करने के लिए कम पड़ रहे हैं। पारामेडिकल स्टॉफ की किल्लत झेलनी पड़ रही है। जिस प्रकार से भूकंप व अगलगी जैसी आपदा से निपटने के लिए बच्चों व युवाओं को स्कूल-कॉलेज स्तर पर ट्रेनिंग दी जाती है। इसी प्रकार कोरोना से निपटने के लिए कार्यक्रम तैयार करना होगा।

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