सावधानः कोरोना की वजह से कई शहरों में नाईट कर्फ्यू, बिहार भी रडार पर

सावधानः कोरोना की वजह से कई शहरों में नाईट कर्फ्यू, बिहार भी रडार पर


चौंकिए मत जनाब, बल्कि हो जाईये आप भी अलर्ट। क्योंकि अब आपकी बारी हो सकती है। इसलिए कोरोना से बचने के लिए सरकार के द्वारा जारी किए गए गाइडलाइन का अनुपालन करें। आपकी छोटी से लापरवाही आपके घर और आपके गांव-शहर को भी जोखिम में डाल सकती है। इसलिए सरकार के आग्रह और अपने विवेक से काम लें।

देश में कोरोना वायरस की महामारी की दूसरी लहर से हालात दिनोदिन बिगड़ता जा रहा है। भारत में गुरुवार को पहली बार एक दिन में कोरोना के 1 लाख 26 हजार 789 केस सामने आने से हड़कंप मचा हुआ है। कोरोना संक्रमितों की संख्या के हिसाब से भारत दुनिया का तीसरा सबसे प्रभावित देश है। महाराष्ट्र के साथ दिल्‍ली, मध्‍य प्रदेश, पंजाब, राजस्‍थान, उत्‍तर प्रदेश आदि में काफी संख्‍या में कोरोना मामले सामने आ रहे हैं। जबकि कोरोना संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए कई राज्‍यों ने नाइट कर्फ्यू का ऐलान कर दिया है। लेकिन हम यहां मध्‍य प्रदेश, यूपी, राजस्‍थान, उत्‍तराखंड, झारखंड, बिहार, छत्‍तीसगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और दिल्‍ली की बात कर रहे हैं। बहरहाल, महाराष्‍ट्र के बाद कोरोना वायरस की सबसे अधिक मार मध्‍य प्रदेश, यूपी, राजस्‍थान और दिल्‍ली पर पड़ रही है. इसी वजह से स्‍थानीय सरकारों ने नाइट कर्फ्यू का ऐलान कर दिया। दिल्‍ली सरकार ने पूरे राज्‍य में 6 अप्रैल से नाइट कर्फ्यू लगा रखा है।
जिस प्रकार से बिहार में कोरोना मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है उसको देखते हुए ऐसा लगता है कि यहां भी कोई न कोई सख्त कदम उठाने पड़ सकते हैं। पीएमसीएच में 100 में 69 बेड फुल, एम्स में 85 बेड पर मरीज हैं भर्ती, एनएमसीएच में 100 बेड में 35 बेड फुल, पारस और रुबन अस्पताल में भी सभी बेड फुल। स्वास्थ्य विभाग बेड बढ़ाने पर कर रहा है विचार। वहीं स्पेशल ट्रोनों के परिचालन से इतना तो तय है कि प्रभावित राज्यों से मरीजों का बिहार आगमन होगा और इस सघन आबादी वाले राज्य में बड़ा विस्फोट हो सकता है। क्योंकि 10 अप्रैल को पहली ट्रेन बिहार आएगी। एक ट्रेन में 24 कोच होंगे। हर एक कोच के लिए एक टीम होगी, हर यात्री की होगी कोविड टेस्ट। मगर सोचने का विषय यह है कि पिछले साल भी इस पर सख्त होने के बावजदू इसे रोका नहीं जा सका था और कोरोनाकाल में आए बिहारी मजदूरों ने कुछ दिन रहकर फिर कोरोना काल में ही ट्रकों में लदकर चुपके से निकल गए थे। जबकि इनके लिए सरकार ने राशन से लेकर आर्थिक मदद तक किया था। क्या पता इनकी इस कार्यशैली से कितना बड़ा जोखिम बिहार को उठाना पड़ सकता है यह तो अब धीरे-धीरे सामने आ ही जाएगा।

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