बख्तियारपुर में पांच स्वतंत्रता सेनानियों की प्रतिमाओं का राज्यपाल ने किया लोकार्पण

बख्तियारपुर में पांच स्वतंत्रता सेनानियों की प्रतिमाओं का राज्यपाल ने किया लोकार्पण

‘आने वाली पीढ़ी इनसे प्रेरणा लेगी और जान सकेगी कि देश की आजादी के लिए कितना त्याग किया गया हैः मुख्यमंत्री’

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पटना: भवन निर्माण विभाग द्वारा बख्तियारपुर में स्थापित 5 अमर शहीदों स्व0 पं0 शीलभद्र याजी (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर,बख्तियारपुर), शहीद मोगल सिंह (प्रखंड कार्यालय परिसर. बख्तियारपुर), शहीद नाथून सिंह यादव (न्यू बाईपास रोड, राघोपुर, बख्तियारपुर), स्व0 डूमर सिंह (श्री गणेश उच्चतर माध्यमिक विद्यालय परिसर, बख्तियारपुर), स्व0 कविराज रामलखन सिंह (डाकबंगला परिसर, बख्तियारपुर) की आदमकद प्रतिमा का राज्यपाल भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्यपाल फागू चौहान ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की उपस्थिति में लोकार्पित किया और सभा को संबोधित किया।
स्व0 पं0 शीलभ्रद याजीः
बख्तियारपुर ग्राम में जन्मे पं. शीलभद्र याजी स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी, प्रथम बिहार विधान (धारा) सभा के सदस्य एवं राज्य सभा के पूर्व सांसद थे। पं. शीलभद्र याजी का राजनैतिक जीवन काफी संघर्षमय रहा है। ‘असहयोग आंदोलन’ में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी।
समाजसेवी स्व. कविराज रामलखन सिंहः
कल्याण बिगहा, नालंदा में जन्मे बिहार के महान देशभक्त एवं समाजसेवी स्व. कविराज रामलखन सिंह का नाम भी प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी के रूप में याद किया जाता है। मात्र 19 वर्ष की अवस्था में इन्होंने ‘साइमन कमीशन’ के भारत आने के देशव्यापी विरोध में 1929 में हिस्सा लिया था और पटना कैम्प जेल में3 माह 15 दिन बिताए थे। ‘नमक सत्याग्रह आन्दोलन’ में हिस्सा लेने के कारण इन्हें अंग्रेजों ने पुनः हिरासत में ले लिया और 1930 में पुनः पटना सिटी कैम्प जेल में 4 माह तक इन्हें कैद रखा गया था। इन्होंने आयुर्वेद की चिकित्सा और समाज सेवा के माध्यम से भरपूर सामाजिक प्रतिष्ठा अर्जित की थी। समाज में ‘मद्य निषेध’ के प्रति भी इन्होंने जागृति पैदा की थी।
शहीद मोगल सिंहः
शहीद मोगल सिंह बख्तियारपुर के गाँव रबाइच के रहने वाले थे। वे 1942 के ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ के अप्रतिम योद्धा थे। बख्तियारपुर थाना को घेरकर प्रदर्शन करने वाले देशभक्तों की टोली की अगुआई करनेवालों में मोगल सिंह प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी थे। बख्तियारपुर थाना में अंग्रेजों द्वारा रबाइच गाँव के लूटने-खसोटने की योजना की जानकारी मिलते ही मोगल सिंह ने थाना के समीप किरासन तेल छिड़क कर वहाँ आग लगाते हुए प्रतिरोध व्यक्त किया। अंग्रेजों ने मोगल सिंह का पीछा किया और उनपर गोलियों की बौछार कर दी। बाद में अपने घर के पास ही 22 अगस्त 1942 को वे शहीद हो गए थे।
शहीद नाथून सिंह यादवः
शहीद नाथून सिंह यादव बख्तियारपुर की जमीन से जुड़े अग्रणी स्वतंत्रता सेनानी थे। इनका जन्म घोसवरी ग्राम में हुआ था। ‘अगस्त क्रांति’ के दौरान 9 अगस्त 1942 को बख्तियारपुर थाना में झंडा फहराने के पश्चात् तत्कालीन थाना प्रभारी द्वारा झंडा का अपमान किये जाने पर देशभक्त नाथून सिंह ने उन्हें ललकारा था। नाराज थाना प्रभारी ने नाथून जी के सीने में गोली दाग दी, जिससे 12 अगस्त 1942 को वे शहीद हो गए।
स्व. डूमर सिंहः
स्व. डूमर सिंह का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनका जन्म करनौती ग्राम, बख्तियारपुर में हुआ था। आजादी की लड़ाई में वे सन 1932 एवं 1936 में 10 माह जेल में रहे। 1942 में जब ‘भारत छोड़ो आन्दोलन शुरू हुआ तो बख्तियारपुर में क्रांति का बिगुल फूकनेवालों में डूमर सिंह प्रमुख थे। इस आन्दोलन में अंग्रेजों ने इन्हें कैद कर लिया और लगभग 3 वर्ष तक ये जेल में रहे। जेल में दी गयी यातना के कारण हुई लीवर की बीमारी से डूमर सिंह की मृत्यु हो गयी।


मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बख्तियारपुर (पटना) में संस्थापित पांच स्वतंत्रता सेनानियों की प्रतिमाओं के लोकार्पण कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि सबसे पहले मैं राज्यपाल जी को बधाई देता हूं कि उन्होंने पांच स्वतंत्रता सेनानियों की प्रतिमाओं का अनावरण करने के मेरे आग्रह को स्वीकार किया। लोकार्पण के दौरान उनके बारे में उन्होंने विस्तार से चर्चा की है। उन्होंने कहा कि मुझे याद है रामचंद्र भारती जी जब एमएलसी बने थे और डाकबंगला पर मूर्ति लगाने की बात कर रहे थे, उस वक्त हमने उनसे कहा था कि सभी स्वतंत्रता सेनानियों की प्रतिमा को स्थापित किया जाए। शीलभद्र याजी जी केवल बख्तियारपुर के ही नहीं बल्कि पूरे देश के थे। नेता जी सुभाष चंद्र बोस के साथ उन्होंने देश की आजादी के लिए काम किया। केंद्र की राजनीति में रहकर सबके लिए काम करते रहे। उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई में जिन स्वतंत्रता सेनानियों ने सक्रिय भूमिका निभायी थी उनकी प्रतिमा बख्तियारपुर में अलग-अलग जगहों पर सबकी प्रतिमा को स्थापित की जाएगी और आज महामहिम राज्यपाल के द्वारा इन प्रतिमाओं का लोकार्पण किया गया है। मैं इस कार्य के लिए भवन निर्माण विभाग को बधाई देता हूं।


मुख्यमंत्री ने कहा कि बख्तियारपुर में स्थापित की गई प्रतिमाओं के लोकार्पण के लिए जब राज्यपाल महोदय से आग्रह किया,तो वे बख्तियारपुर जाने को तैयार थे। कोरोना की वजह से परेशानी न हो इसलिए राज्यपाल भवन से ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रतिमा का अनावरण किया गया। उन्होंने कहा कि प्रतिमा के अनावरण स्थल पर स्वतंत्रता सेनानियों के उपस्थित परिजन एवं वहां की जनता ने भी शहीदों को पुष्प अर्पित कर नमन किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मेरा जन्म बख्तियारपुर में हुआ था, मेरे पिता जी वैद्य थे, जब हमलोग स्कूल में पढ़ते थे तो सब कुछ बचपन में बताया जाता था। आस पास, बिहार, देश-दुनिया के बारे में जानकारी दी जाती थी। सभी लोगों की प्रतिमा स्थापित की गई है, इससे आने वाली पीढ़ी इनके बारे में जानेगी, प्रेरणा लेगी और वो जान सकेगी कि इस देश की आजादी के लिए कितना त्याग किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपिता बापू ने हमें आजादी दिलायी है। हम सबको उनका अनुसरण करते हुए प्रेम, सौहार्द एवं भाईचारे का माहौल बनाकर समाज में एकजुट होकर रहना चाहिए।
इस कार्यक्रम में उपस्थिति के लिए आप सभी लोगों को धन्यवाद देता हूं। राज्यपाल महोदय के प्रति अपना आभार प्रकट करता हूं, कि मेरे जन्म स्थल बख्तियारपुर में आयोजित प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम के लिए आपने समय दिया और प्रतिमा भी स्थापित हो गई।
प्रतिमा लोकार्पण कार्यक्रम को भवन निर्माण मंत्री अशोक चौधरी ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।
इस अवसर पर भवन निर्माण मंत्री अशोक चौधरी, बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य उदय कांत मिश्रा, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव मनीष कुमार वर्मा, मुख्यमंत्री के सचिव अनुपम कुमार, राज्यपाल के सचिव राबर्ट एल0 चोंग्थु, भवन निर्माण विभाग के सचिव कुमार रवि और भवन निर्माण विभाग के सचिव उपस्थित थे। जबकि कार्यक्रम स्थल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं स्वतंत्रता सेनानी के परिजन एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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