….और आखिरकार नीतीश ने कायस्थों के साथ उपेक्षा कर ही दी

….और आखिरकार नीतीश ने कायस्थों के साथ उपेक्षा कर ही दी


पटनाः एक तरफ नीतीश कुमार के साथ गलबहिया कर साथ चलने वाले कायस्थ जो हमेशा से नीतीश सरकार के विकास का गुणगान करती रही है आज उसी को नीतीश कुमार ने बैरंग लौटा दिया। बिहार में कायस्थों के वजूद पर ग्रहण लगा दिया है। 2 फीसदी कायस्थ वोटरों को पहली बार बिहार की सत्ता में भाजपा ने नीतीन नवीन को पथ निर्माण मंत्री बनाकर प्रतिष्ठा देने का तो काम किया। मगर जदयू ने कायस्थ की कोई अहमियत हीं समझी।
बिहार विधान परिषद के लिए राज्यपाल कोटे से मनोनित होनेवाले 12 सदस्यों की सूची जारी होने के साथ ही सियासत का पारा चढ़ गया है। जदयू के पार्टी प्रवक्ता राजीव रंजन ने सूची में एक भी कायस्थ का नाम नहीं देखकर भड़क गए। उन्होंने कहा कि पिछले लंबे समय से कायस्थ समाज को हाशिए पर रखने की कोशिश की जा रही है, पहले विधानसभा में अनदेखी की गई और अब विधान परिषद में उन्हे दरकिनार किया गया। उन्होंने कहा कि अब मुझे यह महसूस होने लगा है राजनीति में इस जाति को उनका हक नहीं दिया जा रहा है। राजीव रंजन ने कहा जेपी आंदोलन से निकले नेता नहीं चाहते कि कायस्थ जाति को राजनीति में जगह मिले। यह बहुत आहत करने वाला है। विपक्ष इस बात को उठाता उससे पहले ही सबसे पहला विरोध नीतीश कुमार की पार्टी के प्रवक्ता राजीव रंजन अपना या किसी दूसरे कायस्थ जाति से जुड़े लोगों के नाम शामिल नहीं होने को लेकर नाराज जताई है। उन्होंने कहा कि जदयू के छह सदस्यों के मनोनयन को मैं मानता हूं कि यह मनोनयन अन्यायपूर्ण है। सीएम द्वारा मनोनयन का अधिकार है। लेकिन इस सूची से मैं आहत हूं। उन्होंने कहा कि कहा कि जदयू के प्रति निष्ठा, कर्तव्यपरायणता, पार्टी का पक्ष मजबूती से रखना हो, पार्टी का सिर कभी झुकने नहीं दिया। ऐसे में मुझ जैसा नेता को नजरअंदाज किया जाना कहीं से सही नहीं ठहराया जा सकता है। इस फैसले से कायस्थों को लिए जदयू में क्या कुछ बचा है। जारी सूची से बेहद नाराज आ रहे राजीव रंजन ने कहा कि वह इस मामले मे सीएम के समक्ष अपनी बात रखेंगे।

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