किसानों का विश्वास पुनः अर्जित करने के लिए- MSP गारण्टी कानून बनाने की घोषणा करे केंद्र सरकारः गोविंदाचार्य

किसानों का विश्वास पुनः अर्जित करने के लिए- MSP गारण्टी कानून बनाने की घोषणा करे केंद्र सरकारः गोविंदाचार्य


किसानों के आंदोलन को लगभग दो महीने होने को आए हैं। हजारों किसान 58 दिन से दिल्ली की सीमाओं पर डटे हुए हैं। लगभग 150 किसानों का दिल्ली सीमा पर बलिदान हो चुका है। अब तक आंदोलन में सहभागी किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच 11 बार बातचीत हो चुकी है। किसानों और केंद्र सरकार के बीच आपसी अविश्वास के कारण अब तक की बातचीत बेनतीजा रहीं हैं। किसान संगठनों की प्रमुख मांगें हैं –
1) केंद्र सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य गारण्टी कानून बनाए और
2) नए बनाए तीन कृषि कानूनों को केन्द्र सरकार वापस ले।
20 जनवरी 2021 को किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच हुई बातचीत में सरकार ने इन विषयों में दो प्रस्ताव किसान संगठनों के सामने रखे हैं।
1) न्यूनतम समर्थन मूल्य पर विचार के लिए केंद्र सरकार एक 11 सदस्यों की समिति बनाने के लिए तैयार है।
2) अगले डेढ़ या दो वर्ष तक केंद्र सरकार तीन कृषि कानूनों को स्थगित रखने के लिए तैयार है।
एक 11 सदस्यों की समिति बनाने के लिए तैयार है और अगले डेढ़ या दो वर्ष तक कद्र सरकार तीन कृषि कानूनों को स्थगित रखने के लिए तैयार है।
किसानों में केंद्र सरकार के प्रति इतना अविश्वास व्याप्त है कि इन दोनों प्रस्तावों को वे आंदोलन को भटकाने या भरमाने की चालबाजी मान रहे हैं। सरकारों ने अबतक किसानों के अनेक आंदोलनों को इसी प्रकार के आश्वासन देकर तोड़ा है। बाद में सरकारें अपने वादे से मुकर जाती है या उसे एक और समिति के हवाले करके अंतहीन प्रक्रिया बना देती है। दोनों में से एक भी मांग को मनाए बिना अगर किसान संगठनों के नेता केंद्र सरकार के उपरोक्त दोनों प्रस्तावों को मान कर आंदोलन स्थगित कर देते हैं तो उनकी साख संदेह के घेरे में आ सकती है। उस कारण फिर नजदीक भविष्य में किसानों का प्रभावी आंदोलन खड़ा करना कठिन हो जाएगा। केंद्र सरकार को इस प्रकार से किसान संगठनों और उनके नेताओं को संकट में नहीं फंसाना चाहिए। इसमें सबसे बेहतर मार्ग है कि केंद्र सरकार किसानों की जायज मांग – न्यूनतम समर्थन मूल्य गारण्टी
का कानून बनाने की घोषणा करके किसानों का विश्वास पुनः अर्जित कर ले। इसी प्रकार तीन कृषि कानूनों पर पुनर्विचार के लिए एक समिति बनाए। उस समिति के निर्णय तक तीन कृषि कानूनों को स्थगित कर दे। ऐसा करने से केंद्र सरकार के प्रति किसानों में व्याप्त अविश्वास भी दूर होगा, किसान नेताओं की साख पर भी प्रश्न नहीं लगेगा और अभी चल रहे आंदोलन को स्थगित करने का मार्ग निकल सकेगा।

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