बीपीएससी परीक्षा पास कर भाजपा विधायक अनिल राम ने पेश की नजीर

बीपीएससी परीक्षा पास कर भाजपा विधायक अनिल राम ने पेश की नजीर

-मुरली मनोहर श्रीवास्तव

बिहार प्रतिभा की भूमि है। यहां की मिट्टी हमेशा से इतिहास रचती है। यहां के युवा अपनी प्रतिभा को पूरी दुनिया को लोहा मनवाते रहते हैं। इसी कड़ी में एक ऐसा नाम जो बिहार में विधायक बनने के बाद बीपीएससी की परीक्षा पासकर आईकॉन बन गए हैं।
हम बात कर रहे हैं इंजीनियर अनिल राम की। बिहार के सीतामढ़ी जिले के बथनाहा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक इंजीनियर अनिल राम ने बीपीएससी के सहायक अभियंता पद की मुख्य परीक्षा में सफलता हासिल कर एक नजीर पेश की है। विधायक बनने से पहले इंजीनियर अनिल राम ने झारखंड राज्य में निर्माण विभाग में जूनियर इंजीनियर के रूप में कार्यरत थे। बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में भाजपा की से तरफ से टिकट मिलने से पहले वे निर्माण विभाग के कर्मचारी के तौर पर सीतामढ़ी, शिवहर और मधुबनी के बेनीपट्टी में कार्यरत थे। चुनाव जीतने के साथ ही इन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र में काम करना शुरु कर दिया था। इसी बीच बीपीएससी की रिजल्ट आया, जिसमें उन्हें सफलता मिली। बचपन से ही वे आरएसएस की नीतियों के साथ काम करने वाले विधायक अनिल राम बिरला इस्टिच्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, रांची से 2015 में सिविल इंजीनियरिंग से स्नातक पासआउट हैं। विश्व हिन्दू परिषद के पुपरी जिलाध्यक्ष अवकाश प्राप्त हेड मास्टर के पुत्र अनिल राम आज की तारीख में युवाओं के लिए नजीर बन गए हैं।

सीतामढ़ी जिले के बथनाहा विधानसभा से विधायक चुने गए अनिल राम के पहले 2010 और 2015 में भाजपा विधायक दिनकर राम थे। इस सीट पर 13 बार विधानसभा हुए चुनावों में तीन बार कांग्रेस और दो-दो बार भाजपा, लोजपा और जनता दल के प्रत्याशी विधायक चुने जा चुके हैं। इसके अलावा अन्य पार्टियों के प्रत्याशी भी एक-एक बार विधायक चुने जा चुके हैं। लेकिन इस बार अनिल राम की जीत ने एक नया समीकरण खड़ा कर दिया है।

बात करें राजनीतिक रुझान की तो इनका बचपन से ही लगाव राजनीति से था। अनिल राम अपने पिता के कार्यो में हाथ बंटाते थे। धीरे-धीरे इनका लगाव पढ़ाई और नौकरी से इतर राजनीति में रमने लगा नतीजा 2020 के चुनाव में बिहार में भाजपा ने इनको टिकट दिया और ये चुनाव जीत गए। अब जबकि उन्होंने बीपीएससी परीक्षा पास कर ली है और बिहार सरकार में नौकरशाह बनने की काबिलियत रखते हैं तो उन्होंने बड़ी ही विनम्रता से इसका जवाब देते हुए कहते हैं कि नौकरशाह बनने की बजाए चुने हुए प्रतिनिधि के रूप में सेवा दूंगा। अब देखने वाली बात ये है कि एक नौकरशाह और जनप्रतिनिधि दोनों की गति मिलेगी तो निश्चित तौर पर विकास की नई इबारत गढ़ी जाएगी।

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