मुख्यमंत्री ने पीएमसीएच के पुनर्विकास परियोजना  का किया  शिलान्यास, कहा हर संभव मदद किया जाएगा

मुख्यमंत्री ने पीएमसीएच के पुनर्विकास परियोजना का किया शिलान्यास, कहा हर संभव मदद किया जाएगा

  • 5,540 करोड़ रुपये की लागत से 5,462 बेड का विश्वस्तरीय अस्पताल बनेगा पीएमसीएच
  • इस परियोजना को 5 वर्षों में पूर्ण करने के लक्ष्य पर तेजी से काम करें : मुख्यमंत्री
  • परियोजना पर तेजी से काम करने के लिए विशेषज्ञों की एक कमिटी बनाकर सतत् अनुश्रवण करायें।
  • इस विश्वस्तरीय अस्पताल में सभी प्रकार की बीमारियों का इलाज होगा।
  • मजबूरी में इलाज के लिए किसी को बिहार के बाहर नहीं जाना पड़े ऐसी व्यवस्था तैयार की जा रही है।

पटनाः   मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पीएमसीएच परिसर में भूमि पूजन एवं शिलापट्ट का अनावरण कर पटना चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल के पुनर्विकास परियोजना का शिलान्यास किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के इस समारोह में आप लोगों की उपस्थिति के लिए आप सभी का अभिनंदन करता हूं। स्वास्थ्य मंत्री एवं स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव सहित अन्य वक्ताओं ने इस परियोजना से संबंधित कई बातों की जानकारी आप लोगों के समक्ष दी है। हमारा भी छात्र जीवन से ही पीएमसीएच से लगाव रहा है। हम बगल के इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ते थे। अटल जी की सरकार में हमलोगों ने इस इंजीनियरिंग कॉलेज को एनआईटी में तब्दील कराया। कॉलेज के दिनों में इस अस्पताल में पढ़ रहे मित्रों से मिलने के लिए पीएमसीएच में आया करते थे। पीएमसीएच का शुरु से अपना विशिष्ट महत्व रहा है। पहले पूर्वी भारत एवं नेपाल के लोग भी यहां इलाज के लिए आते थे। पीएमसीएच को और बेहतर बनाने के लिए अनेक डॉक्टरों से बातचीत होती रही है। पीएमसीएच में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में हम आते रहे हैं और उस दौरान  इसको लेकर  भी चर्चा होती रही है। जब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा जी थे तो उस समय भी एक कार्यक्रम यहां हुआ था उसमें भी उनसे हमारी इस संबंध में बातचीत हुई थी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मंगल पांडेय जी जब स्वास्थ्य मंत्री बने तो  पीएमसीएच का पुनर्निमाण कर विश्वस्तरीय बनाने की योजना पर तेजी से काम शुरु हुआ। इसके लिए विशेषज्ञों की एक कमिटी भी बनाई गयी। आज के कार्यक्रम में  एक प्रस्तुतीकरण  के माध्यम से आप सभी को दिखाया गया है कि पीएमसीएच ककिस तरह यह विश्वस्तरीय अस्पताल बनकर तैयार होगा। इसका निर्माण तीन चरणों में होगा। निर्माण के दौरान पीएमसीएच का काम प्रभावित नहीं होगा। यहां चिकित्सकों, कर्मचारियों एवं छात्र-छात्राओं के रहने के लिए आवास का बेहतर निर्माण किया जायेगा। इस परियोजना में एक-एक बिंदुओं पर ध्यान रखा गया है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में बताया गया है कि इस परियोजना के पूर्ण होने का लक्ष्य 7 वर्ष निर्धारित किया गया है। मेरी ख्वाहिश है कि इसका निर्माण कार्य 5 वर्षों में पूर्ण करें। निर्माण कार्य तेजी से हो इसके लिए विशेषज्ञों की एक कमिटी भी बनायें जो इसका सतत् अनुश्रवण करते रहे। हम भी निर्माण कार्य का जायजा लेने के लिए बिना बताए बीच-बीच में आते रहेंगे और जरुरी सुझाव देते रहेंगे। किसी प्रकार की जरुरत होने पर सरकार की तरफ से पूरा सहयोग दिया जाएगा। जितने संसाधन की जरुरत होगी सब उपलब्ध कराए जाएंगे। पीएमसीएच का निर्माण कार्य तेजी से पूर्ण हो ये हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। पीएमसीएच में लोगों के आवागमन को बेहतर बनाने के लिए इसे गंगा पथ से जोड़ा जा रहा है। अशोक राजपथ से भी एलिवेटेड सड़क बनाकर इसे जोड़ा जाएगा। यहां हेलिकॉप्टर के भी उतरने की व्यवस्था होगी ताकि गंभीर परिस्थिति वाले मरीजों को यहां लाने में सुविधा होगी। यहां गाड़ियों के पार्किंग की भी उचित व्यवस्था होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अस्पताल में सभी प्रकार की बीमारियों का इलाज होगा और अनुसंधान कार्य भी किए जाएंगे। एनएमसीएच, मुजफ्फरपुर, गया के अस्पतालों में भी बेड की संख्या बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। हमलोगों का उद्देश्य है कि किसी को भी इलाज के लिए बिहार से बाहर जाना न पड़े। उन्होंने कहा कि हमलोगों की सरकार आने के पहले राज्य में स्वास्थ्य की क्या स्थिति है सभी जानते हैं। वर्ष 2006 से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को बेहतर बनाए जाने के लिए काम किया जाने लगा। गांव में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य का ख्याल रखा गया है। अब उनलोगों का गांव में रहकर ही नई तकनीक के माध्यम से कई बीमारियों के इलाज का इंतजाम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए हमलोगों ने कई कदम उठाए, चिकित्सकों एवं चिकित्साकर्मियों ने कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए एकजुट होकर काम किया मैं आप सभी लोगों का इसके लिए अभिनंदन करता हूं। कोरोना संक्रमण के दौरान इससे बचाव को लेकर कई पुराने एवं विशेषज्ञ चिकित्सकों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बातचीत होती रही है। वर्ष 2005 में सरकार में आने के बाद पल्स-पोलियो टीकाकरण का कार्य जिस तरह से बिहार में अभियान चलाकर तेजी से किया गया। दुनिया में कोरोना से जितने लोगों की मौत हुई उसकी तुलना में अपने देश में मरीजों की मौत कम हुई। देश में 1.44 प्रतिशत मृत्यु हुई जबकि बिहार में 0.58 प्रतिशत मृत्यु हुई। 10 लाख की आबादी पर कोरोना संक्रमण की औसत जांच जितना देश में हो रही है उससे 22 हजार ज्यादा जांच बिहार में हो रही है। प्रधानमंत्री जी को इस बात के लिए धन्यवाद करते हैं और अभिनंदन करते हैं कि अपने देश में कोरोना वैक्सीन का निर्माण किया गया। प्रथम चरण के वैक्सीनेशन का काम पूरे देश में चल रहा है। दूसरे चरण के टीकाकरण में 50 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के तथा 50 वर्ष के कम आयु के गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों का वैक्सीनेशन कराया जाएगा। लोगों का वैक्सीनेशन निःशुल्क कराया जा रहा है। बिहार में टीकाकरण का काम भी तेजी से हो रहा है। बिहार में कोरोना संक्रमण बहुत घटा है लेकिन फिर भी इससे सचेत और सतर्क रहना है। उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है कि पीएमसीएच की पुनर्विकास कार्य की शुरुआत हो गई है और मेरी इच्छा है कि यह पांच वर्ष में बनकर विश्वस्तरीय स्वरुप में तैयार हो जाए।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री का स्वागत स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत ने हरित पौधा एवं प्रतीक चिन्ह भेंटकर किया। कार्यक्रम के दौरान पटना चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल के पुर्नविकास एवं परियोजना से संबंधित एक प्रस्तुतीकरण भी दी गई।

कार्यक्रम को संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी और विधि एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद, उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद, स्वास्थ्य मंत्री, पथ निर्माण मंत्री, कला-संस्कृति एवं युवा विभाग के मंत्री मंगल पांडेय, विधायक अरुण कुमार सिन्हा, विधायक नितीन नवीन, स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत एवं पीएमसीएच के प्राचार्य विद्यापति चौधरी ने भी संबोधित किया।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव मनीष कुमार वर्मा, मुख्यमंत्री के सचिव अनुपम कुमार, पीएमसीएच के अधीक्षक आई0एस0ठाकुर मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी गोपाल सिंह, प्रमंडलीय आयुक्त संजय कुमार अग्रवाल, बीएमआईसीएल के प्रबंध निदेशक प्रदीप झा, कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति मनोज कुमार, अवर सचिव स्वास्थ्य कौशल किशोर, पुलिस महानिरीक्षक पटना रेंज संजय सिंह, जिलाधिकारी डॉ. चंद्रशेखर सिंह, वरीय पुलिस अधीक्षक उपेंद्र शर्मा सहित वरिष्ठ चिकित्सकगण, पूर्व प्राचार्य, पूर्व अधीक्षक, चिकित्सकगण, कर्मचारीगण, छात्र-छात्राएं एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।

कार्यक्रम के पश्चात देश में चल रहे  किसान आंदोलन के संबंध में पत्रकारों के सवाल का जवाब देते हुए  मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि किसानों से तो बातचीत चल ही रही है। प्रारंभ से यह बताया जा रहा है कि कभी भी मिनिमम सपोर्ट प्राइस समाप्त नहीं होगा बल्कि लोगों को यह आजादी होगी कि वे जहां चाहें अपना अनाज बेच सकते हैं। यह किसानों के हित में है। पंजाब हरियाणा समेत कुछ राज्यों के किसानों को पहले से चली आ रही परंपरा के कारण इसको लेकर भ्रम है। मुझे लगता है कि  कभी भी किसानों के हित के खिलाफ कोई काम नहीं होगा । यह मुझे पूरा भरोसा है। हमलोग बिहार में वर्ष 2006 में ही एपीएमसी एक्ट को खत्म कर दिये थे। हमलोगों ने बिहार के किसानों को आजादी दी। इसके बाद हमलोगों ने प्रोक्योरमेंट के लिए काम किया। अभी काफी प्रोक्योरेंट हो रहा है। हमलोग शुरु से ही किसानों के हित में काम करते रहे हैं। कभी किसी को कष्ट नहीं हो इस पर ध्यान देते रहे हैं। बिहार में ऐसी कोई समस्या नहीं है।  केंद्र सरकार किसानों को सबकुछ एक्सप्लेन करना चाह रही है। हमलोगों को पूरी उम्मीद है कि आंदोलन कर रहे किसानों को सारी बातें स्पष्ट हो जायेंगी। मुझे भरोसा है कि एक दूसरे से बातचीत के बाद वे लोग संतुष्ट होंगे।

 

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