कभी सोनबरसा कचहरी स्टेशन पर हाथी पर सवार होकर आते थे सवारी

कभी सोनबरसा कचहरी स्टेशन पर हाथी पर सवार होकर आते थे सवारी


नीरज कुमार वर्मा/ सहरसा
भारतीय रेलवे का ऐसा स्टेशन जिसके बारे में आपने पहले कभी सुना नहीं होगा पूर्व मध्य रेलवे के समस्तीपुर डिविजन अंतर्गत सहरसा मानसी रेलखंड के बीच सोनबरसा कचहरी रेलवे स्टेशन एक ऐसा स्टेशन हैजो कि लोगों में हेरिटेज बिल्डिंग के नाम से चर्चित है पर इतिहास को आईना दिखाता यह रेलवे स्टेशन खुद ही यात्री असुविधाओं में इतिहास बन गया है ऐसी बात नहीं की रेल अधिकारियों को इस बारे में मालूम नहीं पर सालों से यह रेलवे स्टेशनविभागीय लापरवाही के उपेक्षा का दंश झेल रहा है इस ऐतिहासिक रेलवे स्टेशन के जीर्णोद्धार की कई बार योजना बनाई गई यात्री सुविधाओं के विस्तार से लेकर हिस्टोरिकल प्लेस बनाने की योजना तैयार की गई मगर अधिकारियों के जाते ही सोनबरसा कचहरी रेलवे स्टेशन कोई हिस्टोरिकल प्लेस में बनाने की योजना तो दूर इसे फाइलों में शामिल तक नहीं किया गया वर्ष 2018 में तत्कालीन डीआरएम आरके जैन ने इस रेलवे स्टेशन का निरीक्षण किया था साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस रेलवे स्टेशन से जुड़ी ऐतिहासिक चीजों को डिवीजन में उपलब्ध कराएं ताकि इस रेलवे स्टेशन को हिस्टोरिकल प्लेस में शामिल किया जाए वर्ष 2019 में भी ऐसा हुआ वर्ष जनवरी2020 में जब रेल महाप्रबंधक ऐसे त्रिवेदी वार्षिक निरीक्षण के दौरान सहरसा जंक्शन पहुंचे तो वापसी में सोनबरसा कचहरी रेलवे स्टेशन का भी निरीक्षण किया था स्थानीय ग्रामीणों ने रेलवे जीएम को यात्री सुविधा बढ़ाने के साथ इस रेलवे स्टेशन को ऐतिहासिक रेलवे स्टेशन घोषित करने की मांग पत्र सौंपा रेलवे जीएम ने आश्वासन दिया था कि ऐसा ही होगा मगर रेल अधिकारियों के जाते ही अब तक इस स्टेशन के डेवलपमेंट पर किसी ने ध्यान नहीं दिया यात्री सुविधाओं का बाट जोह रहा यह रेलवे स्टेशन वर्तमान में भी सुविधाओं को ताक रहा है
पूरा रेलवे परिसर अतिक्रमण की चपेट में हैं वर्ष 2018 में इस स्टेशन पर पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तरह लोगों को दुकानें आवंटन करने का आश्वासन दिया गया था लेकिन इसे अब तक लागू नहीं किया गया नतीजा रेल राजस्व को लाखों की क्षति हो रही है बड़े पैमाने पर अतिक्रमण है वही स्टेशन परिसर का एप्रोच रोड भी काफी जर्जर अवस्था में है
स्थानीय निवासी सुधीर कुमार सिंह आशीष रोशन धीरज प्रशांत बताते हैं कि अंग्रेजों के जमाने में बनाया स्टेशन का प्रवेश द्वार काफी ऊंचा है इसे हेरिटेज बिल्डिंग के नाम से भी जाना जाता है यहां के राजा हाथी पर बैठकर इस प्रवेश द्वार से आते जाते थे इसी वजह से प्रवेश द्वार काफी ऊंची बनाई गई ताकि राजा हाथी पर बैठकर आसानी से आ जा सके प्रवेश द्वारा वर्तमान में भी जस का तस है लोगों का कहना है कि वर्ष 2018 में जब तत्कालिक टीआरएम आरके जैन सोनबरसा कचहरी रेलवे का निरीक्षण करने पहुंचे थे इस दौरान रेल अधिकारियों को आदेश दिया कि स्टेशन से जुड़ी पुरानी चीजों को तुरंत डिवीजन में उपलब्ध कराएं ताकि इस स्टेशन को रेलवे हेरिटेज घोषित कर पुरानी चीजों को प्रदर्शनी के तौर पर रखा जा सके
इस स्टेशन पर यात्री सुविधा पूरी तरह नदारद है पीने के पानी से लेकर शौचालय तक की व्यवस्था नहीं है जबकि प्रतिदिन 8000 से 10000 तक रेल राजस्व को फायदा मिलता है यात्रियों के लिए फुटओवर ब्रिज की सुविधा नहीं है जबकि आसपास के छोटे स्टेशन को कोपरिया और बदला घाट में ऐसी सुविधा दी जा रही है यहां एक रैक पॉइंट भी है इस वर्ष में इस स्टेशन से 35 40 रे क पंजाब हैदराबाद सहित बांग्लादेश और नेपाल में ही भेजा गया है किसान और व्यापारियो के लिए कोई उपाय नहीं है रात के अंधेरे में स्टेशन परिसर डूबा रहता है कोई हाई मास्ट लाइट नहीं है राक्षस की चौड़ाई 15 मीटर होनी चाहिए लेकिन मात्र 10 मीटर है जिससे हमेशा हम व्यापारी किसान और मजदूर को खतरा बना रहता है इस संदर्भ में रेल अधिकारियों को भी अवगत कराया गया है
जनवरी 2020 में जब रेलवे के जीएम एलसी त्रिवेदी सहरसा जंक्शन निरीक्षण के लिए पहुंचे थे किसका मेरा है तब स्थानीय लोगों ने रेलवे जीएम से मिलकर पटना हटिया कोसी एक्सप्रेस के ठहराव की मांग सोनवर्षा कचहरी रेलवे स्टेशन पर की थी जीएम ने आश्वासन दिया कि जल्दी कोशी एक्सप्रेस कचहरी रुकेगी लेकिन कोसी एक्सप्रेस तो नहीं सकी इंटरसिटी और जानकी एक्सप्रेस के ठहराव को भी छीन लिया गया यात्रियों की माने तो एक भी एक्सप्रेस ट्रेन के ठहराव नहीं है
हाजीपुर जोन के सीपीआरओ राजेश कुमार ने बताया कि अगर कोई रेलवे स्टेशन को हेरिटेज घोषित करना है तो यूनेस्को रेल मंडल और रेलवे बोर्ड द्वारा तय होता है सोनबरसा कचहरी रेलवे स्टेशन के हेरिटेज बिल्डिंग के बारे में रेलवे के उच्च अधिकारियों से जानकारी ली जाएगी अधिकारियों की टीम खुद इसका निरीक्षण करेगी जिसके बाद रिपोर्ट को रेलवे बोर्ड भेजा जाएगा ताकि रेलवे स्टेशन को हेरिटेज घोषित किया जा सके इसके अलावा यात्री सुविधाओं में भी विस्तार किया जाएगा
समस्तीपुर डिवीजन के सीनियर डीसीएम सरस्वती चंद्र ने बताया कि इस संदर्भ में जानकारी ली जाएगी अगर इतिहास से जुड़ी बातें सामने आती है तो रेलवे को उच्च अधिकारियों को मामले में अवगत कराया जाएगा

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