सत्य के बाज़ार में देर होती है, पर अंधेर नहीं: संत देवराहाशिवनाथ

सत्य के बाज़ार में देर होती है, पर अंधेर नहीं: संत देवराहाशिवनाथ

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आराः जगदीशपुर के सियरुआं स्थित देवराहा धाम में त्रिकालदर्शी योगी संतश्रीदेवराहाशिवनाथजी महाराज ने भक्तों को सम्बोधित करते हुए संतश्री ने कहा कि आज संसार में कलि का व्यापक बाज़ार चल रहा है।उस बाज़ार में तरह-तरह की वस्तुएं खरीदी और बेची जा रही है।लोग सत्य-असत्य सब सत्य के नाम पर खुब बेच और खरीद रहे हैं।ऐसे में सत्य में स्थित व्यक्ति की पहचान मुश्किल है और सत्य में स्थित व्यक्ति का हाल रावण के दरबार में बैठे संतस्वरूप विभीषण के समान है।

विभीषणजी श्रीहनुमानजी से कहते हैं
सुनहु पवनसुत रहनी हमारी।
जिमि दसानन मह जीभ बेचारी।।

अर्थात अनेक दांतो के बीच जो हाल एक अकेली जिह्वा(जिहवा)का है वही हाल रावण के निशाचरों से भरी इस नगरी में मेरा है।भले ही आपको देखने में कुछ लगे पर मेरा हाल अनेक दांतो के बीच जिह्वा वाली हो गई है।
रावण की नगरी में निवास कर रहे विभीषण की जो स्थिति है वही स्थिति आज प्रभु के चरणों का स्मरण करने वाले सत्पुरुषों की है।लेकिन जैसे विभीषण के लिए कुछ देर हुई पर ऐसा नहीं हुआ कि विभीषण रावण की निशाचरी नगरी में ही सदैव के लिये रह गए।विभीषण का उद्धार हुआ।उन्हें प्रभु ने अपने चरणों की शरण में ले लंका का राज भी दे दिया।वैसे ही सत्य में स्थित पुरुषों को घबड़ाना नहीं चाहिये।संसार में जितना भी असत्य फले-फूले पर वह टिकेगा नहीं।सत्य भी फलेगा-फलेगा-खिलेगा।सत्य के बाज़ार में देर है पर अंधेर नहीं।सत्य का कीर्तन करते रहिये असत्य का,ढोंग-पाखण्ड का नाश निश्चित है।

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